सच ही तो कहते हो तुम,
क्या हासिल किया है मैंने?
किस बात पर गुमान हो?
ना आज मेरी जीत है, ना मेरे आंसुओं का कोई खरीदार,
और जिस कल पे कभी इतराई थी मैं…..
तुम जाते जाते,
उन् लम्हों को भी कहानियां कह गए.
जो समझो तो कुछ कहती हैं, नहीं तो बस कोरे कागज़ पर बिखरे से कुछ अलफ़ाज़ हैं
सच ही तो कहते हो तुम,
क्या हासिल किया है मैंने?
किस बात पर गुमान हो?
ना आज मेरी जीत है, ना मेरे आंसुओं का कोई खरीदार,
और जिस कल पे कभी इतराई थी मैं…..
तुम जाते जाते,
उन् लम्हों को भी कहानियां कह गए.
so true lines
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