तिनके

ख़ामोशी

आओ ये ख़ामोशी थोड़ी-थोड़ी बाँट लें,
कुछ तुम लफ्ज़ घोल दो,
कुछ मैं बातें बोल दूँ,
कुछ तूम जज़्बात बयां करो,
कुछ मैं हाल-ए-दिल सुनाऊँ;

अलफ़ाज़ तुम्हारे गर मेरे दिल पर दस्तक दें,
रूबरू हो जाऊं मैं भी फिर उन पहलुओं से,
तुमको थोड़ा जान लूँ, सारे एहसास थोड़े थोड़े बाँट लूँ,
जैसे तुमने भी बांटें थे , कुछ मेरे हिस्से के;

यूँ ज़िन्दगी मधुर नहीं हो सकती,
जो गुन गुना ना मैं दूँ, जो गुन गुना ना तुम दो,
ये दूरियां कम नहीं होंगी,
जो कुछ आगे तुम ना चलो, जो कुछ कदम मैं ना चलूँ |

 

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