तिनके

इज़हार

तेरे इश्क़ का अक्श,
मेरी आँखों में..
मेरे इश्क़ का,
अपनी आँखों से पूछ.
मोहताज़ नहीं ये किसी,
जुबां-ऐ-इज़हार का….

क्या कहूँ अपनी साँसों से ,
गर पूछ बैठें वो अपनी कीमत,
क्या बयां करूँ धड़कनों को,
गर समझें ना वो,
दुनिया मेरी तो उसपे ही जाए सिमट.

उसके होने से ही तो मैं हूँ,
उसके ना होने से…
वजूद ही क्या मेरा?

3 thoughts on “इज़हार”

  1. वाह। बेहतरीन रचना।👌👌
    तेरे इश्क़ का अक्श,
    मेरी आँखों में..
    मेरे इश्क़ का,
    अपनी आँखों से पूछ.
    मोहताज़ नहीं ये किसी,
    जुबां-ऐ-इज़हार का…

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  2. तेरे इश्क़ का अक्श,
    मेरी आँखों में..
    मेरे इश्क़ का,
    अपनी आँखों से पूछ.
    मोहताज़ नहीं ये किसी,
    जुबां-ऐ-इज़हार का…
    ये पंक्तियां दिल को छू गई एक दम।

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