गर तेरे ज़िन्दगी में मेरा दखल,
दर्द का है एहसास…
तू कहे तो रुखसत हो जाऊं मैं,
जो हो उससे तेरे मुस्कान की आगाज़…
जो समझो तो कुछ कहती हैं, नहीं तो बस कोरे कागज़ पर बिखरे से कुछ अलफ़ाज़ हैं
गर तेरे ज़िन्दगी में मेरा दखल,
दर्द का है एहसास…
तू कहे तो रुखसत हो जाऊं मैं,
जो हो उससे तेरे मुस्कान की आगाज़…
Wah wah!
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waah….
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