कल की सोच, कल को संवारने,
यूँ भागे जा रहे हैं सब…
मंज़िल पे तो मौत मिलेगी,
पर ये सफर, जिसका नाम ज़िन्दगी,
उसे जी पा रहे हैं कब?
जो समझो तो कुछ कहती हैं, नहीं तो बस कोरे कागज़ पर बिखरे से कुछ अलफ़ाज़ हैं
कल की सोच, कल को संवारने,
यूँ भागे जा रहे हैं सब…
मंज़िल पे तो मौत मिलेगी,
पर ये सफर, जिसका नाम ज़िन्दगी,
उसे जी पा रहे हैं कब?
सवाल तो हैं, सच में!
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खुबसूरत है सच में…
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Dhanywaad
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